{"product_id":"napoleon-hill-ke-mahan-bhashan-by-napoleon-hill-hindi-paperback","title":"NAPOLEON HILL KE MAHAN BHASHAN :  by Napoleon Hill - (Hindi - Paperback)","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003e\u003cspan class=\"a-text-bold\"\u003e\u003cstrong\u003e\u003cspan style=\"color: rgb(232, 23, 23);\"\u003e224 Pages\u003c\/span\u003e\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e——————————————————————————\u003c\/strong\u003e\u003c\/span\u003e\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cspan\u003eडॉ. हिल ने देखा कि जीवन में आर्थिक समृद्धि हासिल करनेवाले लोगों के पास चाहे कितने ही पैसे हों, फिर भी वे दुनिया के सबसे दुःखी व असंतुष्ट लोग होते हैं।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cspan\u003eनेपोलियन हिल अपने भाषण देते समय एक से ज्यादा पृष्ठों के नोट बहुत कम इस्तेमाल करते हैं। उनके ऐसे बहुत से नोट्स तो अब भी मौजूद हैं, लेकिन उन्होंने वास्तव में जो बोला, वह बहुत कम बचा हुआ है। अपने दादाजी के मुद्रित भाषणों में से एक भाषण तलाशने में मुझे कई साल लग गए। यह एक भाषण मिलना भी मेरे लिए प्राण-पोषक से कहीं बहुत ज्यादा था; यह चमत्कारी था।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cspan\u003eजो दस्तावेज मुझे मिला, वह वर्ष 1922 में सलेम कॉलेज (अब सलेम इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी) में दिए गए आरंभिक भाषण की लिखित प्रति थी। यह एक स्थानीय समाचार-पत्र में ‘इंद्रधनुष का अंत’ शीर्षक से प्रकाशित हुआ था। उसकी एक प्रति सलेम कॉलेज के संग्रहालय में माइक्रोफिल्म पर संरक्षित थी। प्रकाशन के लिए इसे बड़ा करके पढ़ने की जरूरत थी और इसका पाठ इतना फीका था कि उसे रिकवर करने में एक दिन से ज्यादा का समय लग गया। इसके लिए मुझे एक-एक शब्द बोलकर अपनी पत्नी को लिखाना पड़ा।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Prabhat Prakashan Private Limited","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":52896348406076,"sku":"9390378834","price":300.0,"currency_code":"INR","in_stock":false}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0970\/8375\/2764\/files\/d.jpg?v=1773901921","url":"https:\/\/prabhatprakashan.in\/products\/napoleon-hill-ke-mahan-bhashan-by-napoleon-hill-hindi-paperback","provider":"Prabhat Prakashan Private Limited","version":"1.0","type":"link"}