Collector Sahab : From Village Lanes To The Reins of Governance by IAS Dr. Ranjit Kumar Singh (Hindi - Paperback)
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यह पुस्तक 'कलेक्टर साहब' किसी एक व्यक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि गाँवों में पलने वाले उन लाखों बच्चों के सपनों की आवाज है, जो सीमित संसाधनों और सामाजिक दबावों के बावजूद बड़े लक्ष्य देखने का साहस रखते हैं। छोटे से गाँव से निकलकर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा को पार करना केवल बुद्धिमत्ता का नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प, आत्मविश्वास और निरंतर परिश्रम का परिणाम होता है।
कहानी अर्जुन के कठिन बचपन से लेकर उसके आई.ए.एस. अधिकारी बनने तक की यात्रा को दर्शाती है। रास्ते में उसे आर्थिक तंगी, सामाजिक अन्याय, राजनीति और भ्रष्टाचार से जूझना पड़ता है। बावजूद इसके वह ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के मार्ग से नहीं डगमगाता। अधिकारी बनने के बाद भी अर्जुन सत्ता के दबावों के सामने झुकता नहीं, रेत माफिया जैसे संगठित अपराधों के खिलाफ निर्भीक काररवाई करता है और जनहित को सर्वोपरि रखता है।
उपन्यास में गुरु-शिष्य संबंध, परिवार का त्याग, पत्नी का संबल और सच्चे मित्रों का साथ भावनात्मक गहराई जोड़ते हैं। यह कृति बताती है कि सच्ची सफलता पद या सम्मान से नहीं, बल्कि चरित्र, साहस और समाज के प्रति जिम्मेदारी से मिलती है। 'कलेक्टर साहब' हर उस पाठक के लिए प्रेरणास्त्रोत है, जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों और मूल्यों से समझौता नहीं करना चाहता।
यह पुस्तक पाठकों के लिए संघर्ष से संकल्प तक की यात्रा को समझने वाली एक प्रेरक और ज्ञानवर्धक कृति है।