Haldighati Yuddha Ke Vijeta Maharana Pratap - by Vijay Nahar (hindi - Paperback)
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महाराणा प्रताप एक ऐसे प्रबल पराक्रमी, राजनीतिज्ञ, कूटनीतिज्ञ, प्रखर बुद्धिमान, प्रत्युत्पन्नमति तेजस्वी वीर हुए हैं, जिन्होंने अपना सर्वस्व राष्ट्रदेवता के चरणों में समर्पित कर दिया। जीवन में एक भी युद्ध में पराजित नहीं हुए। हिंदू धर्म, संस्कृति के लिए जीवन के अंतिम क्षण तक अकबर जैसे विदेशी आक्रांता से संघर्ष करते रहे और उसे निराश हताश एवं मानसिक रूप से पराजित किया।
हल्दीघाटी युद्ध के लिए इतिहासकारों में मतभेद है। इस ग्रंथ में उन सभी तथ्यों को उजागर करते हुए पुष्ट प्रमाणों से यह सिद्ध किया गया है कि हल्दीघाटी युद्ध में मेवाड़मणि महाराणा प्रताप विजयी रहे। इस युद्ध के तीन चरण थे- प्रथम हल्दीघाटी, द्वितीय खमनोर एवं तृतीय गोगुंदा। तीनों स्थानों पर मुगल सेनापति मानसिंह एवं आसफ खाँ बुरी तरह पराजित हुए।
महाराणा प्रताप के साथ यहीं युद्ध समाप्त नहीं हुआ। मानसिंह एवं आसफ खाँ की पराजय के पश्चात् स्वयं अकबर ने महाराणा प्रताप के विरुद्ध तीन आक्रमण किए, बक्सी साइबाजखान के नेतृत्व में तीन आक्रमण, अब्दुल रहीम खानखाना के नेतृत्व में एक आक्रमण तथा आमेर कुँवर जगन्नाथ कछवाह, जाफर खाँ एवं सैयद राजू के नेतृत्व में एक आक्रमण। हल्दीघाटी के अलावा ऐसे 8 आक्रमण किए। परंतु महाराणा प्रताप ने गुरिल्ला युद्ध में सभी को पराजित किया।
यह कथा है महाराणा प्रताप के पराक्रम की, गौरव की, स्वाभिमान की, नीतिज्ञता की, कूटनीति की, हिंदुत्व एवं भारतीय सांस्कृतिक स्वाभिमान की।