Jo Meri Nas-Nas Mein Hai (Pb) By Manoj Muntashir Shukla : (Book In Hindi)-Paperback
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1999 मुलुंड, मुंबई का एक इलाका; रात के लगभग 11 बजे का समय ! मेन रोड से लगी हुई कुछ खोलियाँ; उनमें से एक का दरवाजा तेज आवाज के साथ खुलता है और VIP का एक फटा-पुराना बैग बाहर फेंक दिया जाता है । साथ ही एक महिला के चीखने की आवाज आती है, ' जेब में दो कौड़ी नहीं और बातें बड़ी -बड़ी, कहीं और जाके भीख माँग।' हवा में फेंका हुआ बैग खुल जाता है।
'एक डायरी के कुछ पन्ने, एक फाइल में रखे हुए कुछ ए-4 साइज के कागज फड़फड़ाते हुए सड़क पर चारों ओर बिखर जाते हैं ।
23 साल का एक लड़का खोली के उसी खुले हुए दरवाजे से दौड़ता हुआ बाहर आता है और बदहवास हवा में उड़ते हुए पन्ने समेटने लगता है । आधी रात होने को है, लेकिन सड़क पर ट्रैफिक अभी कम नहीं हुआ। आती-जाती गाड़ियों से बेपरवाह वह लड़का रोता जा रहा है और एक-एक पन्ने के पीछे भागता जा रहा है। ब्रेक मारती हुई गाड़ियों से मुँह निकालकर लोग गालियाँ बकते हैं, ' अबे, मरेगा कया ।' पता नहीं यह तमाशा कितनी देर चला, लेकिन लड़के ने सारे पन्ने समेट लिये और हवा ने सारे आँसू सुखा दिए । समेटे हुए वही पन्ने और सूखे हुए आँसू किताब बनकर आज आपके हाथों में हैं--सँभाल लीजिए ।